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दहेज़ प्रताड़ना से तंग होकर मजबूर विवाहिता ने की आत्महत्या!!

गडरारोड. तहसील क्षेत्र के गिराब थाना अन्तर्गत फोगेरा गांव में बुधवार दोपहर एक विवाहिता ने आत्महत्या कर ली। पीहर पक्ष ने हत्या का मामला दर्ज करवाया। पुलिस अधीक्षक मामले की जांच कर रहे हैं। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार जैसलमेर के झाबरा गांव निवासी मनमोहन सिंह पुत्र रतन सिंह ने मामला दर्ज करवाया कि उसकी बहन ललिताकंवर की शादी
अशोक सिंह पुत्र दानसिंह राजपुरोहित के साथ 2009 में हुई थी।

ससुराल पक्ष वाले विवाह के बाद से दहेज को लेकर सास हरिकंवर, ससुर दानसिंह, पति अशोकसिंह, ननद अम्बिका, मंजू उसके साथ मारपीट कर प्रताडि़त करते थे। इस दौरान समाज स्तर पर समझाइश की गई। वहीं कुछ समय के लिए उसे पीहर भी रखा, लेकिन सामाजिक स्तर पर समझाइश के बाद उसे वापिस भेज दिया।

बावजूद इसके उसके साथ मारपीट होती रही। दो बार उसे मारने का प्रयास भी किया गया। इसके बावजूद भी प्रताडऩा कम नहीं होने पर इस पर उसने बुधवार को आत्महत्या कर ली। मामले की जांच चौहटन उप अधीक्ष्ज्ञक अजीतसिंह कर रहे हैं। थानाधिकारी गिराब माधोसिंह ने बताया कि मामला दर्ज किया है।

चलो द्रोपदी शस्त्र उठा लो अब गोविन्द ना आयेगें |
मरूधरा की एक और बेटी दहेज के लालची कुत्तों की भेंट चढी |आखिर कब तक?
हम उस देश के निवासी है जहां नारी को शक्ति का रूप माना गया है उस देश में ऐसा हो रहा है |आखिर कब तक?
गलती किसकी?
गलती बेटी की नही है हमारे समाज की है जो हमने दहेज को स्टेटस का सवाल बना लिया |रिश्ता तो घरवाले तय करते हैं |साथियों आप सभी से निवेदन है कि ऐसे लोगो से रिश्ता ही नहीं करे |
ऐसे हरामी पिल्लों को सुधारने का समय आ गया है |
जो भी दहेज मांगे साले के भरे बाजार में जूते मारो |
मेरा आप सबसे यही सवाल है आखिर कब तक बहन बेटियाँ ऐसे ही जलती रहेगी दहेज की होली मे |
शायद सबका जवाब येही होगा कि जब तक हम ऐसे कुत्तों के आगे निवाला डालते रहेंगे तब तक |
आज ही सब संकल्प ले कि ना दहेज लेंगे और ना ही देंगे |
शादी से पहले ही मांग ले तो उस के साथ रिश्ता ही मत करो और बाद में मांगे तो जूत्ते मारो |आखिर कब तक बेटियाँ जलती ही रहेगी | अगर हम खुद सुधर गये तो समाज स्वयं ही सुधर जायेगा |
अगर मेरी बात से किसी दहेज प्रेमी समाज प्रेमी की भावनाएं आहत हुई हो तो मैं माफी चाहता हूँ |
अब और कोई बेटी दहेज की आग में ना जले |
अन्त में मेरा यही सवाल फिर से है कि आखिर बेटियाँ कब तक जलती रहेगी?

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